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Sapne

आज चारपाई पर बैठकर चार सपने बुने है मैने ! कुछ उलझे सुलझे और कुछ फटे पुराने भी है पर फिर भी चार सपने बुने है मैने!! थोडे से चाद सितारे ,और मोतियो की माला भी ! पहनाई है ,ऑखो मे सुरमा काजल और होठो पे लाली भी लगाई है!! पूरे हो या ना हो ,सजाया बहुत है मैनै इन्हे ! इसीलिए तो नज़र का काला टीका भी लगाया है मैनै इन्हे!! जहा भी एक सपना!  डगमगाया सा नज़र आया मेरा,!! सासे थम सी गई मेरी,! फोरन उस पर '' राई नमक '' वार फेर करने मै भागी!! फिर बैठी नये बनाने सपने अपने! कुछ अनजाने,और कुछ बेगाने से !! कुछ इठलाते और कुछ बलखाते से! फिर से लगी मै बुनने चार सपने अपने से !!!astha