MERI MAA...
जरा... याददाश्त कमजोर हो चली है तुम्हारी ! अब ना सुनाई देता हैऔर ना दिखाई!! चेहरे की झुरिया और बालो का फिका रंग साफ बता रहाहै कि बूढी हो चली है मेरी मा!! वो घुटने जो मुझे मंदिर ,स्कूल और बाजार ले जाया करते थे आज घर मे बाम लगाए ,मायूस बैठे है!! आए दिन घर मे नए पकवान बनाना और मुझे सिखाना,आज खुद रात कि ठंडी रोटी खाकर सोजाना साफ बता रहा है बूढी हो चली है मेरी मा!! घर के मंदिर मे घंटो बैठकर पूजा करना और फिर बिना दिया जलाऐ ही आरती कर देना,साफ बता रहा है कि अब बूढी हो चली है मेरी मा!!!....... astha