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Sapne

आज चारपाई पर बैठकर चार सपने बुने है मैने ! कुछ उलझे सुलझे और कुछ फटे पुराने भी है पर फिर भी चार सपने बुने है मैने!! थोडे से चाद सितारे ,और मोतियो की माला भी ! पहनाई है ,ऑखो मे सुरमा काजल और होठो पे लाली भी लगाई है!! पूरे हो या ना हो ,सजाया बहुत है मैनै इन्हे ! इसीलिए तो नज़र का काला टीका भी लगाया है मैनै इन्हे!! जहा भी एक सपना!  डगमगाया सा नज़र आया मेरा,!! सासे थम सी गई मेरी,! फोरन उस पर '' राई नमक '' वार फेर करने मै भागी!! फिर बैठी नये बनाने सपने अपने! कुछ अनजाने,और कुछ बेगाने से !! कुछ इठलाते और कुछ बलखाते से! फिर से लगी मै बुनने चार सपने अपने से !!!astha

MERI MAA...

जरा...  याददाश्त कमजोर हो चली है तुम्हारी ! अब ना सुनाई देता हैऔर ना दिखाई!! चेहरे की झुरिया और बालो का फिका रंग साफ बता रहाहै कि बूढी हो चली है मेरी मा!! वो घुटने जो मुझे मंदिर ,स्कूल और बाजार ले जाया करते थे आज घर मे बाम लगाए ,मायूस बैठे है!! आए दिन घर मे नए पकवान बनाना और मुझे सिखाना,आज खुद रात कि ठंडी रोटी खाकर सोजाना साफ बता रहा है बूढी हो चली है मेरी मा!! घर के मंदिर मे घंटो बैठकर पूजा करना और फिर बिना दिया जलाऐ ही आरती कर देना,साफ बता रहा है कि अब बूढी हो चली है मेरी मा!!!....... astha
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